रेप के झूठे आरोप में एक बेगुनाह 19 साल 3 महीने जेल में कैद , मां-बाप और दो भाइयों को खो दिया

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Lucknow : मामला ललितपुर के सिलावन गांव का है। उम्र 44 साल। साल 2002 में 23 साल की उम्र में विष्णु को रेप के इल्जाम में जेल में बंद कर दिया गया। उसके 19 साल 3 महीने जेल में बंद रहने के बाद पता चला कि उसने रेप किया ही नहीं। लड़की के परिवार ने आपसी विवाद के चलते उस पर झूठा इल्जाम लगाया था। अपनी बेगुनाही साबित करने के बाद जब वो बाहर आया तो उसके मां-बाप और दो भाइयों की मौत हो चुकी थी।
कहानी शुरू होती है साल 2002 के सितंबर महीने से। दोपहर का वक्त था। उस वक्त विष्णु की उम्र करीब 23 साल थी। पढ़ाई में मन नहीं लगता था, इसलिए स्कूल छोड़ दिया था। पिता किसान थे तो वो भी अपने खेती में मदद करने लगा। एक दिन वो घर से खाना खाकर रखवाली करने के लिए खेत की तरफ गया।

जब वो खेत पंहुचा तो वहां गाय-भैंस पूरी फसल खराब कर रहीं थीं। वो अपने खेत से जानवरों को भगाने लगा, तभी कुछ लोग दौड़कर आए और उसको रोकने लगे। ये लोग विष्णु के ही गांव के थे। देखते ही देखते विष्णु और उन लोगों के बीच बहस शुरू हो गई, गाली-गलौज होने लगी। मामला जब ज्यादा बढ़ गया तो विष्णु घर की तरफ भाग आया।
विष्णु जब घर पहुंचने वाला था तो उसे लगा कि अगर मां और पिताजी को पता चला कि वो खेत में लड़ाई करके आया है तो उसे घर पर डांट पड़ेगी। इसी डर से वो घर पहुंचा और रिश्तेदार के यहां जाने की बात कहकर तुरंत भाग निकला।

देर शाम तक गांव में इस लड़ाई की बात फैल गई। लेकिन सबको लगा इस तरह की बहस गांव में होती रहती हैं, कुछ दिन में सब ठीक हो जाएगा।

दो दिन बीते… विष्णु अपने रिश्तेदारों के घर पर ही था। एक रात उसकी अपने बड़े भाई से बात हुई कि वो घर वापस आ जाए। अब घर पर सब ठीक है, कोई उससे नाराज नहीं है।

कहानी यही नहीं खत्म हुई। अगली सुबह… सब अपना-अपना काम कर रहे थे कि अचानक कुछ पुलिसवाले विष्णु के घर पहुंचे। पुलिसवालों ने बताया कि गांव की एक दलित महिला ने विष्णु पर रेप करने का आरोप लगाया है।

ये महिला उन्हीं लोगों की बहु थी जिनसे कुछ दिन पहले खेत में विष्णु का विवाद हुआ था। 16 सितंबर 2002 को वो महिला पुलिस थाने पहुंची। उसने पुलिस को बताया कि तीन दिन पहले यानी 13 सितंबर को दोपहर 2 बजे वो खेत जा रही थी। तभी विष्णु पास आया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगा। महिला ने विरोध किया तो विष्णु ने उसे जोर से पकड़कर खींचा और उसका रेप किया।

महिला ने अगले दिन पूरी बात अपने ससुर को बताई। एक दिन बाद महिला अकेले थाने पहुंची और रेप का केस दर्ज कराया। जिसके बाद पुलिस विष्णु के घर उसको गिरफ्तार करने पहुंच गई।

अपने बेटे पर रेप के आरोप सुनकर माता-पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्होंने तुरंत विष्णु को फोन लगाकर उसे घर आने को कहा। कुछ देर बाद वो घर पहुंचा तो पुलिस ने बिना किसी सवाल जवाब उसे उठाकर थाने में बंद कर दिया।

महिला ने अपने बयान में कहीं भी जातिसूचक शब्दों का जिक्र नहीं किया। लेकिन वो दलित थी इसलिए पुलिस ने अपने मन से विष्णु पर SC/ST एक्ट लगाकर चार्जशीट तैयार कर ली। मामला लोअर कोर्ट में गया।

कोर्ट ने विष्णु को रेप और SC/ST एक्ट के तहत सजा सुनाई और जेल भेज दिया। जबकि महिला की मेडिकल रिपोर्ट में रेप का जिक्र ही नहीं था।

विष्णु बताते हैं कि उन पर ऐसा इल्जाम लगा था कि जेल में मौजूद दूसरे कैदी भी आते-जाते ताने देते। उन्हें रेपिस्ट कहकर बुलाते थे। कई बार जेल में उनके साथ मारपीट भी हुई। उसने बताया कि जेल में अफसर कई बार मारते-पीटते थे। उसे जलील किया जाता था।

विष्णु जेल में बंद था। इधर पूरा परिवार अपनी सारी कमाई उसका केस लड़ने में लगा देता। धीरे-धीरे सारी जमीन कम दाम पर बेच दी। अब ना उनको विष्णु की रिहाई का कोई आसरा नजर आ रहा था, ना ही केस लड़ने के लिए उनके पास पैसे बचे थे।

वक्त बीता। विष्णु का पूरा परिवार उस पर लगे इस आरोप को बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। इसी दुःख में साल 2013 में विष्णु के पिता की मौत हो गई। तब से ही उसकी मां भी गुमसुम रहने लगीं। करीब 1 साल बाद उनकी भी मौत हो गई। साथ ही 2 साल के अंतर पर विष्णु के दो भाइयों की भी जान चली गई।

विष्णु को जब अपने पिता की मौत का पता चला तो उसने उनकी अर्थी को कन्धा देने के लिए जेल से बाहर जाने की अपील की लेकिन उसे परमिशन नहीं मिली। विष्णु टूट गया था। इसलिए मां की मौत की बात घर वालों ने उसे नहीं बताई। तीन साल बाद जब उसके भाई की मौत हुई तब उसे अपनी मां की मौत का भी पता चला।

विष्णु के घर के चार लोगों की मौत हो गई लेकिन उसे जेल से बाहर आने की इजाजत नहीं मिली। उसके मां-बाप और दो भाई उसको रेपिस्ट मानकर ही इस दुनिया से चले गए।

विष्णु को जेलर समेत जेल में मौजूद लोगों ने कुछ पैसे दिए। वो हाथ में 600 रुपए लेकर जेल से बाहर आया। अब वो 43 साल का हो गया था। विष्णु बताते हैं कि जेल से आने पर उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वो अपनी जिंदगी कैसे शुरू करें। वो अपने परिवार के 4 लोगों को खो चुका था। इसी बीच कुछ NGO सामने आए और विष्णु की मदद की। उनके दिए पैसों से घर चलने लगा साथ ही विष्णु भी अब छोटे-छोटे काम करके पैसे इकठ्ठा कर लेता था।

विष्णु की जिंदगी धीरे-धीरे ठीक होने लगी थी। तभी उसके एक दोस्त ने उसे शादी करने की सलाह थी। वो तैयार तो हो गया लेकिन उसकी उम्र ज्यादा थी तो लड़की मिलने में मुश्किल हो रही थी। तभी एक दोस्त ने उसे एक लड़की के बारे में बताया। उसे लड़की पसंद थी लेकिन शादी करने के लिए विष्णु को 1 लाख रुपए देने थे।

उसने पैसे का इंतजाम किया। मंदिर में विष्णु की शादी हो गई। लेकिन ये खुशी बस कुछ घंटों की थी। अगली सुबह उसकी पत्नी घर से कुछ गहने और पैसे चुराकर भाग गई।

विष्णु के परिवार ने केस लड़ने के लिए पूरी जमीन पहले ही बेच दी थी। जो कमाया वो शादी में खत्म हो गया। बचा हुआ वो लड़की लेकर भाग गई। अब विष्णु के पास रहने के लिए आवास के नाम पर खंडहर पड़ा एक कमरे का मकान है। विष्णु ने किराए पर एक ऑटो लिया है जिससे थोड़ा पैसे कमाकर वो अपना गुजारा कर रहे हैं। वो कहते हैं कि जो थोड़े पैसे आते हैं उनसे समझ नहीं आता कि ऑटो की किश्त भरें या अपने राशन का इंतजाम करें।

वो बताते हैं कि जब वो जेल से बाहर आए तो उनसे मिलने कई नेता, SP और DM आए। उन्होंने आवास, राशन देने का वादा भी किया। लेकिन सरकार की तरफ से आज तक कोई मदद नहीं मिली है। इसलिए उन्होंने कुछ दिन पहले अपील की है कि सरकार उन्हें आवास और उचित मुआवजा दे जिससे वो अपना घर चला सकें।

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