भारत में 2021 में 7.3 फीसदी आबादी के पास थी डिजिटल करेंसी: संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट

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नई दिल्ली, 12 अगस्त। कोरोना महामारी के दौरान विश्व भर क्रिप्टोकरंसी में निवेश अभूतपूर्व दर से बढ़ा है. संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की नई रिपोर्ट के मुताबिक इस दौरान भारत में भी क्रिप्टोकरंसी में निवेश करने वालों की संख्या बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 7.3 फीसदी लोगों के पास डिजिटल करंसी है. संयुक्त राष्ट्र की व्यापार और विकास संस्था यूएनसीटीएडी ने कहा कि 2021 में क्रिप्टोकरंसी रखने वाली आबादी की हिस्सेदारी के लिहाज से 20 शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में से 15 विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाएं थीं. इस लिस्ट में 12.7 प्रतिशत के साथ यूक्रेन शीर्ष पर है.

यूएनसीटीएडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि साल 2021 में डिजिटल करंसी रखने के मामले में दुनिया के शीर्ष 20 देशों में भारत सातवें स्थान पर है. रिपोर्ट में कहा गया कि यूक्रेन के बाद रूस में 11.9 फीसदी आबादी के पास डिजिटल करंसी है. वेनेजुएला में 10.3 फीसदी, सिंगापुर में 9.4 फीसदी और अमेरिका में आठ फीसदी से अधिक लोगों के पास क्रिप्टोकरंसी है.

क्रिप्टोकरंसी भारत में करीब दस साल पहले आ गई थी और तभी से सरकार की इस नई मुद्रा व्यवस्था पर टेढ़ी नजरें रही हैं. 2018 में तो केंद्रीय बैंक ने क्रिप्टोकरंसी को बैन ही कर दिया था. दो साल पहले देश के सुप्रीम कोर्ट ने यह बैन हटा दिया था और तब से भारत में क्रिप्टोकरंसी का बाजार तेजी से बढ़ा है. शोध संस्था चेनालिसिस के मुताबिक जून 2021 तक एक साल में ही भारत का क्रिप्टोकरंसी बाजार 650 फीसदी बढ़ चुका था जो वियतनाम के बाद दूसरी सबसे ज्यादा वृद्धि थी.

क्रिप्टो आबादी में यूक्रेन शीर्ष पर

यूक्रेन- 12.7 फीसदी
रूस -11.9 फीसदी
वेनेजुएला- 10.3 फीसदी
सिंगापुर- 9.4 फीसदी
केन्या- 8.5 फीसदी
अमेरिका- 8.3 फीसदी
भारत- 7.3 फीसदी
द. अफ्रीका- 7.1 फीसदी
नाइजीरिया- 6.3 फीसदी
कोलंबिया- 6.1 फीसदी

विकसित देशों में सिंगापुर सबसे आगे


सिंगापुर – 9.4%
अमेरिका – 8.3%
ब्रिटेन – 5.0%
कोरिया – 3.8%
ऑस्ट्रेलिया – 3.4%

इसी साल आम बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने क्रिप्टो और एनएफटी को वर्चुअल डिजिटल संपत्ति के तहत लाने का ऐलान किया था और इससे होने वाली कमाई पर 30 फीसदी का टैक्स लगा दिया था. यहीं नहीं एक फीसदी टीडीएस अलग से लगाया गया था.

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साल 2022-23 के बजट में भारत सरकार ने अगले साल मार्च से पहले डिजिटल रुपया शुरू करने की भी बात कही थी. वित्त मंत्री ने बताया था कि डिजिटल रुपया ब्लॉकचेन तकनीक पर आधारित होगा.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का रुख क्रिप्टोकरंसी के खिलाफ रहा है. इसी साल फरवरी में आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने क्रिप्टोकरंसी के खिलाफ लोगों को चेताया था. उन्होंने कहा था, “निजी क्रिप्टोकरंसी मैक्रो-इकोनॉमिक्स और वित्तीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा हैं. निवेशकों को इस बात को दिमाग में रखना चाहिए कि वे अपने खतरे पर निवेश कर रहे हैं.”

ईडी के निशाने पर क्रिप्टोएक्सचेंज

पिछले दिनों प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जनमाई लैब प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों में से एक के ठिकानों की तलाशी ली थी. ये निदेशक क्रिप्टोकरंसी एक्सचेंज वजीरएक्स का मालिक है. ईडी ने 64 करोड़ रुपये से अधिक के बैंक बैलेंस को फ्रीज करने का आदेश दिया था.

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