बच्चे न हो साइबरबुलिंग का शिकार इसके लिए करें ये काम,

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भारत में साइबरबुलिंग की पीड़ा का अनुभव करने वाले बच्चों का अनुपात लगभग 85 फीसदी है और यही उनुपात उन पर भी लागू होता है जो इसे करते हैं। ये रेश्यो जो ग्लोबल औसत से लगभग दोगुना है। ये रिपोर्ट भारत में साइबर सुरक्षा कंपनी McAfee द्वारा किये गये नए अध्ययन पर तैयार की गई है। साइबरबुलिंग को कभी-कभी “कुछ ऑनलाइन कमेंट को बोल कर छोड़ दिया जाता है।

साइबर अपराध के मामले आए दिन आते रहते हैं और अब रिपोर्ट में चौंकाने वाला आंकड़ा सामना आया है. McAfee की साइबरबुलिंग रिपोर्ट से पता चला है कि 42 प्रतिशत भारतीय बच्चे नस्लवादी साइबर धमकी का शिकार रहे हैं, जो दुनिया (28 प्रतिशत) की तुलना में 14 प्रतिशत ज़्यादा है. सोमवार को जारी इस रिपोर्ट के मुताबिक  85% भारतीय बच्चों को अंतरराष्ट्रीय औसत से दोगुनी साइबर धमकी (Cyberbullying) का सामना करना पड़ता है.

भारत में लड़कियों में भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यौन उत्पीड़न की उच्चतम दर देखी गई है, जो 10 से 14 आयु वर्ग में 32 प्रतिशत और 15 से 16 आयु वर्ग में 34 प्रतिशत है.

इन जगहों पर सबसे ज़्यादा होती है साइबरबुलिंग:

1-Message- टैबलेट और मोबाइल फोन के लिए ऐप्स भेजना.

2-Social media – फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर पर

3-Online – मैसेज बोर्ड, चैट रूम और रेडिट जैसे फोरम पर..

4-ऑनलाइन चैटिंग, डायरेक्ट मैसेज और इंस्टेंट मैसेजिंग

5- गेमिंग कम्यूनिटी द्वारा..

6-Email द्वारा.

अपने बच्चों को Cyberbullying से कैसे रखें सेफ:

Password Sharing: अपने बच्चे को हमेशा इस बात को लेकर समझाएं कि वह अपने पासवर्ड किसी के साथ भी शेयर न करें. चाहे वह उनका सबसे अच्छा दोस्त ही क्यों न हो.

Privacy: अपने बच्चे को हमेशा प्राइवेसी सेटिंग को लेकर जागरूक करें. उनके साथ बैठे और उनके सोशल मीडिया के अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग को अडजस्ट करें, जिससे कि सिक्योरिटी बढ़ जाती है. इसमें टैग ब्लॉक, फोटो शेयरिंग को ऑफ करना बहुत ज़रूरी होता है.

Awareness: अपने बच्चे को इस बात के बारे में जरूर कहें कि अगर कोई उन्हें परेशान करके या डरा धमकाकर कोई काम कराता है तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है. वह उस समय डरने के बजाए मां-बाप से शेयर करें.



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