एक कमरा बनाने में जेब पर बढ़ा 11 फीसदी का भार

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महंगाई शब्द छोटा है लेकिन इनदिनों इसकी मार से हर तरफ हाहाकार है। रोटी, कपड़ा, स्टेशनरी व जरूरती समान के बाद अब मकान निर्माण पर भी मार दोगुनी हो गई है। मूल जरूरतों पर महंगाई की मार पड़ने से घर चलाने में मुश्किलों की घड़ी आ गई है।

अब मकान में दस गुणे दस का एक कमरा बनाने के जुगाड़ में लोगों की जेब पर इनदिनों 10 से 14 फीसदी का अतिरिक्त चार्ज पड़ रहा है। यू कहे तो एक महीने में सरिया को छोड़कर सभी सामानों के दामों में वृद्धि हुई है। आदर्श नगर निवासी मोहित दीक्षित बताते हैं कि मकान छोड़िए, एक कमरा बनाना मुश्किल है। अब तो बारिश बाद के समय का इंतिजार है। उन दिनों भाव नरम होते हैं। जिससे काम कराना आसान होगा।

औसतन खर्च निकाला तो बढ़ा भार

महंगाई के बाद 11 से 15 फीसदी भार आम आदमी पर बढ़ गया है। एक महीना पहले (लागत-76820 रुपए) की तुलना में आज (लागत-85280 रुपए) एक कमरा बनाने पर लगभग 8500 रुपए अधिक खर्च करना पड़ रहा है। यह औसत अनुमान दस गुणे दस के एक कमरा बनाने में उपयोग होने वाली सामग्री और उसके दामों को जोड़ने के बाद निकाला गया है। ऐसे में निर्माण का दायरा अब जैसे जैसे बढ़ रहा है भवन निर्माण सामग्रियों की महंगाई भी उतनी ही प्रभावित कर रही है।

सरिया हुई सस्ती, मौरंग सबसे महंगी

मकान निर्माण में काम आने वाली सरिया इन दिनों सस्ती हुई है। तीन महीने पहले 8300 रुपए प्रति कुंतल बिकने वाली सरिया अब 62 से 6500 रुपए प्रति कुंतल बिक रही है। उधर, मौरंग पहले 4000 रुपए में आने वाली एक ट्राली मौरंग अब 6000 प्रति ट्राली आ रही है। दुकानदारों का कहना है कि बारिश की वजह से मौरंग महंगी हुई है।

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