आफत की बारिश: दुर्ग संभाग में बाढ़ के हालात, 30 गांव बने टापू, 500 ग्रामीणों का किया गया रेस्क्यू

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दुर्ग/बेमेतरा, 13अगस्त। छत्तीसगढ़ में चार दिनों से हो रही भारी बारिश से जन जीवन अस्त व्यस्त है। दुर्ग संभाग की जीवनदायनी शिवनाथ ने भी इस बार अपना रौद्र रूप दिखाया है। बाढ़ का पानी नदी किनारे के आसपास के गांवाें तक पहुंच गई है। जिससे बेमेतरा, दुर्ग व कवर्धा जिले के कई गांव टापू में तब्दील ही चुकें हैं। बेमेतरा जिले के एक गांव के 800 लोग फंसे हुए है। वहीं दुर्ग के शिवनाथ नदी के किनारे गांवो व खेतों में फंसे किसानों का रेस्क्यू किया जा रहा है।

दुर्ग के इन गांवों से 100 लोगों का रेस्क्यू
लगातार हुई बारिश से शिवनाथ नदी खतरे के निशान से 12 फीट उपर तक बह रहा है। बाढ़ का पानी नदी किनारे के आसपास के गांवाें तक पहुंच गया है। पानी की वजह से झेंझरी, कोनारी टापू बन गए है। डांडेसरा, बेलौदी, बसनी समेत 15 गांवों तक बाढ़ का पानी पहुंच गया है। प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थान पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं बाढ़ में फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। डांडेसरा और भरदा में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है।
इट भठ्ठे में फंसे लोगों को बाहर निकाला
एसडीआरएफ की टीम ने दुर्ग जिले के ग्राम डंडेसरा में शिवनाथ नदी के किनारे भुट्टा बाड़ी में फंसे पति और पत्नी को रेस्क्यू किया गया। बाढ़ के कारण दोनों ने रातभर मकान के छत के उपर रहे। इसके अलावा कोनारी भरदा गांव के ईट भट्टे में 10 लोग फंसे हुए थे। उन्हें भी SDRF दुर्ग द्वारा सफलता पूर्वक रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थान पर पंहुचाया गया।

बेमेतरा के गांवों में बाढ़, किया गया रेस्क्यू
दुर्ग संभाग में पिछले 4 दिनों से लगातार बारिश के कारण कवर्धा जिले का सुतियापाठ व सरोधा बांध छलक रहा है। जिसके कारण बेमेतरा जिले के संकरी नदी, हांफ,व फोक नदी उफान पर है। जिसके चलते बेमेतरा जिले के अंतिम छोर में बसे गांव पचभैया, दाढ़ी, बरबसपुर, मरका समेत 15 गांवो में पानी भर गया है। पचभैया गांव में खेतों और मकानो पानी भरने की वहज से चार किसानो बाढ़ में फंसे गए थे। किसानो ने रात भर पेड़ में चढ़ कर गुजारे आज बेमेतरा जिला प्रशासन की टीम ने रेस्क्यू कर उन्हें बाढ़ से बाहर निकाला।

नवागढ़ के करमसेन में 800 लोग फंसे
बेमेतरा जिले के नवागढ़ क्षेत्र के करमसेन गांव टापू में तब्दील हो चुका है। यहां से आने जाने वाले सभी रास्तों में पानी भरा है। इस गांव में 800 ग्रामीण फंसे हुए हैं। जिला प्रशासन ने ग्रामीणों से की अपील लोग सुरक्षित स्थान में जाये। इसके साथ ही नवागढ़ में मुख्य बाजार तक छोइहा व मोहरगिया नाले का पानी पहुंच गया है।

कलेक्टर परिसर में बना कंट्रोल रूम
नदियों और गांवो में बाढ़ की स्थिति के चलते दुर्ग व बेमेतरा जिला प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। डुबान क्षेत्र में फंसे हुए ग्रामीणों को सुरक्षित स्थान में पहुंचाया जा रहा हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्कूलों व पंचायत भवन में पहुंचाया गया है और रहने खाने की व्यवस्था की गई है। वही बेमेतरा के कलेक्टर जितेंद्र शुक्ला ने भी लोगों से अपील की है कि वह बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ना जाएं और सुरक्षित जगह पर रहे और अगर किसी चीज की आवश्यकता होती है तो वह कंट्रोल रूम फोन कर मदद मांग सकते हैं।

गांवो में जारी किया अलर्ट
जिले में लगातार हो रही बरसात के चलते जिले से बहने वाली जीवनदायिनी शिवनाथ, खारून, हाफ नदी और सुरही नदी ,के साथ छोटे नाले भी उफान पर हैं, जिसे लेकर जिला प्रशासन की टीम के अधिकारी कर्मचारी को अलर्ट कर दिया गया है और जिला मुख्यालय में हेल्पलाइन नम्बर जारी कर एक कंट्रोल रूम तैयार किया गया है। ताकि बाढ़ संभावित किसी प्रकार की कोई समस्या आने पर मदद पहुंचाई जा सके।

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