18 जुलाई से शुरु हो रहा संसद का मानसून सेशन , जानिए सदन में किन शब्दों के इस्तेमाल पर लगा बैन

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संसद के 18 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र में भारत के राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव पहले दिन होगा

क्या है संसद सत्र

सामान्यतः प्रतिवर्ष संसद के तीन सत्र या अधिवेशन होते हैं। यथा बजट अधिवेशन (फरवरी-मई), मानसून अधिवेशन (जुलाई-अगस्त) और शीतकालीन अधिवेशन (नवंबर-दिसंबर)। किंतु, राज्यसभा के मामले में, बजट के अधिवेशन को दो अधिवेशनों में विभाजित कर दिया जाता है। इन दो अधिवेशनों के बीच तीन से चार सप्ताह का अवकाश होता है

मॉनसून सत्र

संसद का मॉनसून सत्र सोमवार यानी आज से शुरू हो रहा है। इस सत्र में सरकार कई विधेयकों को पारित कराने के एजेंडे के साथ सदन में आएगी। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष ने भी अपनी कमर कस ली है और वह पूरी तैयारी के साथ सदन में आने वाला है। विपक्ष कोरोना की दूसरी लहर से निपटने के तरीके,  पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि और किसान आंदोलन के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी कर रहा है। किसान आंदोलन का मुद्दा पिछले सत्र में भी छाया रहा था लेकिन कोई हल नहीं निकल पाया था।

बता दें कि प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। पीएम मोदी ने कहा था कि बैठक के दौरान सांसदों ने काफी महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने सदन में सार्थक बहस होने की उम्मीद जताई है। पीएम मोदी की बैठक के बाद विपक्षी दलों ने अलग बैठक कर संसद में सरकार को घेरने की रणनीति बनाई। संसद के मॉनसून सत्र में विपक्ष और  सरकार के बीच दो-दो हाथ होना तय माना जा रहा है।

असंसदीय शब्दों की सूची क्या है

नयी दिल्ली, 14 जुलाई (भाषा) लोकसभा सचिवालय द्वारा ‘‘असंसदीय शब्दों’’ की सूची के संकलन में आम बोलचाल के कुछ शब्दों को शामिल किए जाने को लेकर पैदा हुए विवाद के बाद सरकारी सूत्रों ने बृहस्पतिवार को कहा कि ‘‘यह नया सुझाव या आदेश नहीं है’’ क्योंकि इन शब्दों को संसद और राज्य विधानसभाओं के पीठासीन अधिकारियों द्वारा पहले ही कार्यवाही से बाहर निकाला जा चुका है।

उन्होंने कहा कि इन शब्दों को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कार्यकाल के दौरान भी असंसदीय माना गया था।

उल्लेखनीय है कि संसद के दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान सदस्य अब चर्चा में हिस्सा लेते हुए ‘‘जुमलाजीवी, बाल बुद्धि सांसद, शकुनी, जयचंद, लॉलीपॉप, चाण्डाल चौकड़ी, गुल खिलाए, पिठ्ठू’’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे । ऐसे शब्दों के प्रयोग को अमर्यादित आचरण माना जायेगा और वे सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं होंगे।

दरअसल, लोकसभा सचिवालय ने ‘‘ असंसदीय शब्द 2021 ’’ शीर्षक के तहत ऐसे शब्दों एवं वाक्यों का नया संकलन तैयार किया है जिन्हें ‘असंसदीय अभिव्यक्ति’ की श्रेणी में रखा गया है।

विपक्षी दलों ने इस सूत्री में शामिल शब्दों के लिए सरकार की आलोचना की है और कहा कि ‘‘भाजपा कैसे देश को बर्बाद कर रही है, इस बारे में उनकी ओर से इस्तेमाल किए जाने हर शब्द’’ को असंसदीय बता दिया गया है।

सरकारी सूत्रों ने उल्लेख किया कि ऑस्ट्रलिया की संसद में ‘‘एब्यूज्ड’’ (अपमानित या प्रताड़ित) शब्द को असंसदीय माना जाता है जबकि क्यूबेक की नेशनल एसेंबली में ‘‘चाइल्डिशनेस’’ (बचकानापन) शब्द इस्तेमाल नहीं होता है।

उन्होंने बताया कि ‘‘बजट में लॉलीपोप’’ होने और ‘‘आप झूठ बोलकर यहां पहुंचे हैं’’ जैसे वाक्यों या मुहावरों को पंजाब विधानसभा में कार्यवाही से बाहर किया गया था।

सूत्रों ने कहा कि ‘‘अंट, शंट, अक्षम, अनपढ़, अनर्गल’’ जैसे शब्दों को छत्तीसगढ़ की विधानसभा की कार्यवाही से निकाला गया है।

एक सूत्र ने कहा, ‘‘इनमें से अधिकतर शब्द ऐसे हैं जो संप्रग सरकार के दौरान भी असंसदीय माने जाते थे।’’

रिकॉर्ड से कैसे हटाते हैं

नियम 380 के मुताबिक अगर अध्यक्ष को लगता है, कि सदन में चर्चा के दौरान असंवेदनशील, अपमानजनक या असंसदीय भाषा का इस्तेमाल सांसद द्वारा किया गया है, तो अध्यक्ष लोकसभा की कार्यवाही से उन्हें हटाने का आदेश दे सकता है.हिंदी या अंग्रेजी समेत विभिन्न भारतीय भाषाओं में कई ऐसे शब्द हैं, जिन्हें ‘असंसदीय’ माना गया है. लोकसभा के स्पीकर और राज्यसभा के सभापति का काम सदन की कार्यवाही के रिकॉर्ड से इन शब्दों को दूर रखना होता है. इसके लिए नियम 381 के मुताबिक, ‘सदन की कार्यवाही का जो हिस्सा हटाना होता है, उसे मार्क किया जाएगा और कार्यवाही में एक फुटनोट इस तरह से डाला जाएगा कि ‘अध्यक्ष के आदेश के मुताबिक हटाया गया’

इन राज्यों में भी हटे असंसदीय शब्द

असंसदीय अभिव्यक्ति के संकलन में छत्तीसगढ़ विधानसभा में कार्यवाही से हटाए गए कुछ शब्द या वाक्यों को भी रखा गया है जिनमें बॉब कट हेयर, गरियाना, अंट-शंट, उच्चके, उल्टा चोर कोतवाल को डांटे आदि शामिल हैं। इसमें राजस्थान विधानसभा में असंसदीय घोषित कुछ शब्दों को भी रखा गया है जिसमें कांव-कांव करना, तलवे चाटना, तड़ीपार, तुर्रम खां तथा झारखंड विधानसभा में अससंदीय घोषित कई घाट का पानी पीना, ठेंगा दिखाना आदि शामिल है।

विपक्ष ने क्या कहा?

कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुकलेट को नए भारत की नई व्याकरण की रचना बताया. चौधरी ने कहा कि हम सदन में इन शब्दों का प्रयोग करेंगे. सरकार आज कह रही है की ये शब्द मत बोलो कल कहेगी की भगवा पहन कर सदन में आओ.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इसे नई इंडिया की नई डिक्शनरी बताया. उन्होंने कहा कि सिर्फ उन शब्दों को बैन किया गया है, जिन से सरकार के सही काम को बताया जाता है.
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने भी नए आदेश का विरोध किया है. राघन ने कहा नई लिस्ट देखकर लगता है की सरकार जानती है की उनके काम को कौन से शब्द बखूबी परिभाषित करते हैं इसलिए सिर्फ उन्ही शब्दों को लिस्ट से हटा दिया गया है.

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने नई लिस्ट का विरोध करते हुए कहा कि इस लिस्ट में ‘संघी’ शब्द आखिर क्यों नहीं शामिल है. उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले लगभग सभी शब्दों पर प्रतिबंध लगा रही है. क्या ‘सत्य’ असंसदीय शब्द है.

बता दें कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा है कि अमर्यादित शब्दों पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. सिर्फ इन शब्दों को अमर्यादित घोषित किया गया है. ओम बिरला ने कहा कि अमर्यादित शब्दों को हटाने की प्रक्रिया 1954 से चली आ रही है. हर बार असंसदीय शब्दों पर किताब का विमोचन किया जाता था. हमने सिर्फ कागजों को बचाने के लिये इसे इंटरनेट पर डाला है. सरकार ने इन शब्दों को बैन नहीं किया

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