भारत के गेहूं में ‘ रूबेला वायरस’ बताने वाले तुर्की की चाल पकड़ में आई,वायरस को लेकर मोदी सरकार ने कही बड़ी बात

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लोकसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा- रूबेला वायरस इंसानों में पाया जाता है, गेहूं में नहीं. गेहूं एक्सपोर्ट बंद होने से किसानों को नुकसान होने की बात कर दी खारिज…कभी मार्केट में एमएसपी से अधिक है

रूस-यूक्रेन युद्ध और हीट वेब की वजह से इस साल गेहूं की फसल काफी चर्चा में रही है. उसकी मार्केट वैल्यू में रिकॉर्ड वृद्धि हुई. जो गेहूं आमतौर पर ओपन मार्केट में 15-16 सौ रुपये प्रति क्विंटल में बिकता था उसका दाम 3000 रुपये तक पहुंच गया. जिसे सरकारी मंडियों में बेचने के लिए किसानों की लाइन लगी रहती थी उसके लिए इस बार सरकार इंतजार करती रह गई. उसकी खरीद आधे से भी कम हो गई. हमने अनाज संकट से घिरे कई देशों को गेहूं एक्सपोर्ट करके उनकी मदद की और अपने लिए पैसा कमाया. लेकिन तुर्की और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने भारतीय गेहूं में रुबेला वायरस मिलने का आरोप लगाकर यहां के किसानों और सरकार को असहज कर दिया. अब लोकसभा में केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस मामले पर लिखित तौर पर जवाब दिया है.

जेडीयू सांसद कौशलेन्द्र कुमार और राजीव रंजन सिंह ने गेहूं को लेकर तुर्की के मुद्दे के अलावा एक्सपोर्ट पर प्रतिबंध से किसानों को हुए नुकसान के बारे में भी किसानों से जानना चाहा है. जवाब में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध के कारण किसानों को कोई नुकसान नहीं हुआ है. गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध के बाद भी इसकी घरेलू कीमतें एमएसपी से अधिक हैं.

रूबेला वायरस इंसानों में पाया जाता है, गेहूं में नहीं

तोमर ने कहा कि कुछ समाचार पत्रों ने बताया कि रूबेला वायरस के कारण भारतीय गेहूं की खेप को तुर्की ने अस्वीकृत कर दिया था. जबकि, यह वायरस इंसानों में पाया जाता है और यह गेहूं या किसी अन्य पौधे के उत्पादों से संबंधित नहीं है. तुर्की के नेशनल प्लांट प्रोटक्शन आर्गेनाइजेशन (एनपीपीओ) ने आधिकारिक तौर पर सूचित किया कि भारतीय गेहूं की खेप को गेहूं रोगजनक (टिलेटियाइंडिका) के करनाल बंट से ग्रसित होने के कारण अस्वीकृत किया गया था.

जिस गेहूं को तुर्की ने मना किया उसे इजराइल ने लिया

तोमर ने कहा कि गेहूं एक्सपोर्ट के लिए मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) के अनुसार गेहूं की खेप का निरीक्षण किया गया था. तुर्की जाने वाली गेहूं की खेप करनाल बंट से मुक्त थी. वही खेप इजराइल को भेजी गई थी, जिसे इजराइल सरकार द्वारा स्वीकार कर लिया गया था. सरकार ने इसके जरिए यह बताने की कोशिश की है कि तुर्की ने भारत के गेहूं को लेकर झूठ बोला था.

तोमर ने बताया कि जब भी भारत के बाहर गेहूं की खेप जाती है उस समय कोरंटीन उपायों का पालन किया जाता है. खेप का निरीक्षण प्लांट क्वारंटाइन निरीक्षकों द्वारा किया जाता है. इसका प्रयोगशाला परीक्षण किया जाता है और अन्य देशों की प्लांट हाइजीन आवश्यकताओं का पालन करते हुए एक्सपोर्ट किया जाता है.

ओपन मार्केट में गेहूं बेचने से कितनी कमाई?

केंद्र सरकार ने दावा किया है कि किसानों को खुले बाजार में गेहूं का दाम एमएसपी से औसतन 135 रुपये प्रति क्विंटल अधिक मिला है. किसानों ने गेहूं 2150 रुपये प्रति क्विंटल के औसत रेट से बेचा. जबकि एमएसपी सिर्फ 2015 रुपये थी. इस तरह किसानों को एमएसपी की तुलना में 5994 करोड़ रुपये अधिक कमाई होने का अंदाजा लगाया गया है.

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