पिघला पहाड़ बन गयी दो देशों की सीमा अब बना विवाद, सरकारें हैं परेशान

0
28

जर्मेट : कुदरत के खेल भी निराले हैं। इंसानों ने दशों के बीच सीमा रेखा बनाए, लेकिन प्रकृति को किसी सीमा रेखा से कोई मतलब नहीं है। क्या आप यकीन कर सकते हैं, कि पहाड़ पिघलने की वजह से स्विट्जरलैंड और इटली की सीमा रेखा बदल गई है और इस वजह से दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया है। दोनों सरकारें परेशान हैं, कि अब नये सिरे से इस सीमा विवाद का हल कैसे करें।

ग्लेशियर पिघलने के बाद बनी दो सिमा रेखा

स्विट्जरलैंड और इटली के बीच बर्फीले पहाड़ के पिघलने की वजह से दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया है और इतालवी पर्वत लॉज को लेकर दोनों देशों के बीच विवाद शुरू हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, जहां पर दोनों देशों की सीमा रेखा अब तक थी, वहां पर एक नहर दोनों देशों की सीमा को विभाजित करती थी, और इसी नहर को दोनों देश सीमा रेखा मानते हैं। लेकिन ग्लेशियर पिघलने की वजह से अब स्थिति बदल गई है और पहाड़ के किसी भी तरफ से अब ये नहर बह सकता है, जिसकी वजह से विवाद ये शुरू हो गया है, कि ये पहाड़ अब किस देश का होगा और क्या नहर को ही सीमा रेखा विभाजन का निशान माना जाएगा?

पर्वत को लेकर शुरू हुआ विवाद

स्विट्जरलैंड और इटली के बीच थियोडुल ग्लेशियर है, जो वाटरशेड रिफ्यूजियो गाइड डेल सर्विनो की ओर बढ़ गया है। ये ग्लेशियर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा है और ये 3,480 मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। लेकिन अब विवाद शुरू हो गया है, कि आखिर ये ग्लेशियर किस देश का है। 59 साल के एक पर्यटक फ्रेडरिक, जो एल्प्स पर्वत पर रेस्टोरेंट में आए थे, उन्होंने मेन्यू कार्ड इटालियन भाषा में देखा, जर्मन में नहीं, जबकि उसपर जो कीमत लिखा था, वो स्विट्जरलैंड की मुद्रा में था और किसी पर्यटक के लिए ये काफी चौंकाने वाला था। लिहाजा, फ्रेडरिक ने काउंटर पर पूछा, कि ‘इस वक्त हम इटली में हैं या फिर स्विट्जरलैंड में?’ इस पर्वत को लेकर साल 2018 में दोनों देशों के बीच डिप्लोमेटिक वार्ता शुरू हुई थी और करीब एक साल तक बातचीत चलती रही, लेकिन इस वार्ता के विवरण को गुप्त रखा गया। वहीं, लोगों का कहना है कि, अब स्थिति और भी ज्यादा पेचीदा हो गया है।

पर्वत को लेकर शुरू हुआ विवाद

स्विट्जरलैंड और इटली के बीच थियोडुल ग्लेशियर है, जो वाटरशेड रिफ्यूजियो गाइड डेल सर्विनो की ओर बढ़ गया है। ये ग्लेशियर पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र रहा है और ये 3,480 मीटर क्षेत्र में फैला हुआ है। लेकिन अब विवाद शुरू हो गया है, कि आखिर ये ग्लेशियर किस देश का है। 59 साल के एक पर्यटक फ्रेडरिक, जो एल्प्स पर्वत पर रेस्टोरेंट में आए थे, उन्होंने मेन्यू कार्ड इटालियन भाषा में देखा, जर्मन में नहीं, जबकि उसपर जो कीमत लिखा था, वो स्विट्जरलैंड की मुद्रा में था और किसी पर्यटक के लिए ये काफी चौंकाने वाला था। लिहाजा, फ्रेडरिक ने काउंटर पर पूछा, कि ‘इस वक्त हम इटली में हैं या फिर स्विट्जरलैंड में?’ इस पर्वत को लेकर साल 2018 में दोनों देशों के बीच डिप्लोमेटिक वार्ता शुरू हुई थी और करीब एक साल तक बातचीत चलती रही, लेकिन इस वार्ता के विवरण को गुप्त रखा गया। वहीं, लोगों का कहना है कि, अब स्थिति और भी ज्यादा पेचीदा हो गया है।

बनता जा रहा है जटिल मुद्दा

उन्होंने कहा, “हम उस क्षेत्र को लेकर झगड़ रहे हैं, जिसकी कोई कीमत नहीं है।” लेकिन उन्होंने कहा कि यह “एकमात्र स्थान है जहां हमें अचानक एक इमारत शामिल हो गई”, जिससे इस क्षेत्र की कीमत काफी बढ़ गई है। वहीं, एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, इटली के अधिकारियों ने इसे जटिल अंतर्राष्ट्रीय मुद्दा बताते हुए टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं, स्विसस्टोपो के पूर्व प्रमुख जीन-फिलिप एमस्टीन ने कहा कि, इस तरह के विवादों को आम तौर पर समान सतह क्षेत्र और मूल्य की भूमि के पार्सल का आदान-प्रदान करके हल किया जाता है। लेकिन, इस मामले में, “स्विट्जरलैंड को ग्लेशियर का एक टुकड़ा प्राप्त करने में कोई दिलचस्पी नहीं है,” उन्होंने समझाते हुए कहा कि,”इटालियंस स्विस सतह क्षेत्र के नुकसान की भरपाई करने में असमर्थ हैं”।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here