अद्भुत अफ्रीका : जीवन में सिर्फ एक बार नहाते हैं अनोखी जनजाति के लोग, ढकती हैं सिर्फ आधा शरीर

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Himba Tribe of Namibia: दक्षिण अफ्रीका की हिंबा जनजाति की महिलाएं जीवन में एक बार नहाती हैं। इस समुदाय में हर शख्स का एक जीवन-गीत होता है जो अफ्रीका में बसने वाली जनजातियां हजारों साल पुरानी सभ्यता और रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए दुनियाभर में मशहूर हैं। अफ्रीका में उत्तर-पूर्व नामीबिया का कुनैन प्रांत घर है ऐसी ही एक प्रजाति का जिसका जीवन अपने आप मे किसी कहानी जैसा लगता है।

नामीबिया में रहने वाले करीब 20-50 हजार हिंबा जनजाति के लोग जिस तरह से अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं, वह कभी काल्पनिक लगता है लेकिन है एकदम सच। इस जनजाति की महिलाओं को अफ्रीका में सबसे खूबसूरत माना जाता है। खास बात यह है कि इस जनजाति की महिलाएं जिंदगी में सिर्फ एक बार नहाती हैं, वह भी सिर्फ तब जब उनकी शादी होती है। रत्नेश प्राकृतिक तेल और गैस को खोजने का काम करते हैं। पिछले ग्यारह सालों से पूर्वी अफ्रीकी देश तंजानिया के दार ऐस सलाम शहर में रहते हैं।

कौन होते हैं हिंबा?

हिंबा खानाबदोश लोग हैं। वे रेगिस्तान की कठोर जलवायु में रहने के अभ्यस्त होते है, और बाहरी दुनिया से अपने आप को अलग रखते हैं। ये सुबह, दोपहर, शाम ज्यादातर दलिया खाते हैं जो मक्के या बाजरे के आटे के बना होता है। ये लोग बाजरे को महांगू कहते हैं जो नामीबिया में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। वहीं शादी समारोह या किसी खास मौकों पर ये लोग मीट खाना पसंद करते हैं। अफ्रीका के अन्य आदिवासी समाज की तरह हिंबा के लोग भी गाय पर निर्भर हैं। यहां तक कि अगर समूह में किसी के पास गाय नहीं है, तो उसे सम्मान की नजरों से नहीं देखा जाता है। वे मवेशी पालते हैं, जिनमें गायों के साथ साथ बकरी और भेड़ भी होते हैं। गायों का दूध निकालने की जिम्मेदारी महिलाओं पर होती है।

सिर्फ इस दिन नहाती हैं महिलाएं

अफ्रीका के नॉर्थ-वेस्ट नामीबिया के कुनैन प्रांत में रहने वाली हिम्बा जनजाति की महिलाएं जिंदगी में सिर्फ एक बार नहाती हैं, वो भी सिर्फ तब जब उनकी शादी होती है। उन्हें पानी का इस्तेमाल करना मना है। यहां तक कि वे कपड़े भी नहीं धो सकतीं। यहां की महिलाओं की त्वचा का रंग भी लाल होता है। इसके पीछे भी एक बड़ा कारण है।

हिम्बा जनजाति की महिलाएं नहाने की जगह खास जड़ी-बूटियों को पानी में उबालकर उसके धुंए से अपनी बॉडी को फ्रेश रखती हैं ताकि उनसे बदबू ना आए। इसकी खुशबू से इनकी बॉडी कभी ना नहाने के बाद भी फ्रेश लगती है।

इस ट्राइब की महिलाएं अपनी स्किन को धूप से बचाने के लिए खास तरह के लोशन का इस्तेमाल करती हैं। यह लोशन जानवर की चर्बी और हेमाटाइट (लोहे की तरह एक खनिज तत्व) की धूल से तैयार किया जाता है। हेमाटाइट की धूल की वजह से उनके त्वचा का रंग लाल हो जाता है। ये खास लोशन उन्हें कीड़ों के काटने से भी बचाता है।कहा जाता है कि महिलाएं इस वजह से भी हेमाटाइट का इस्तेमाल करती हैं ताकि उनका रंग लाल हो जाए और वह पुरुषों से अलग दिखें। इन महिलाओं को रेड मैन के नाम से भी जाना जाता है।

आखिर रोजाना क्यों नहीं नहाती महिलाएं?

जनजाति की महिलाएं खुद को साफ और फ्रेश रखने के लिए एक खास तरह की जड़ी-बूटी का इस्तेमाल करती हैं। इन जड़ी-बूटियों को उबालकर उसके धुएं से अपने शरीर को तरो-ताजा रखती हैं। इससे उनके शरीर से दुर्गन्ध नहीं आती। इसके अलावा अपनी त्वचा को धूप से बचाने के लिए वो एक खास तरह के लोशन का इस्तेमाल करती हैं, जिसकी वजह से जनजाति सी सभी महिला लाल रंग की नजर आती है। यह लोशन जानवर की चर्बी और हेमाटाइट (लोहे की तरह एक खनिज तत्व) की धूल से तैयार किया जाता है।

कहलाती है ‘रेड मैन’

इस लोशन से उन्हें कई फायदे मिलते हैं और कीड़े व मच्छर भी उनसे दूर रहते हैं। इन महिलाओं को बाहरी दुनिया में ‘रेड मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। जनजाति की महिलाओं का पहनावा भी अजीब होता है, वह सिर्फ लुंगी पहनती हैं जबकि ऊपरी भाग खुला रहता है। हिंबा लोग काफी धार्मिक भी होते हैं, अपने ईष्ट देव ‘मुकुरू’ से प्रार्थना के लिए वह आग का इस्तेमाल करते हैं। बच्चों की देखभाल से लेकर अन्य सभी काम महिलाएं ही करती हैं। महिलाएं अक्सर पुरुषों की तुलना में कड़ी मेहनत करती हैं।

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