नीचे प्रदर्शित चित्र आपको अपने बचपन के दिनों की सवारी पर ले जाएंगे । पेपर बोट कुछ सुंदर चित्र लेकर आया है जो आपको आपकी अधिकांश क़ीमती भावनाओं की याद दिलाएगा और आपको लापरवाह पुराने समय में वापस ले जाएगा।

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क्या होता है जब एकाएक पुरानी यादों का झोंका आता है?आप अतीत में वापस जाते हैं,एक पल के लिए वहीं रहते हैं,परिवेश को महसूस करते हैं जैसे कि यह वर्षों पहले हुआ करता था,और चाहते हैं कि सब कुछ हमेशा के लिए श्वेत-श्याम हो! एक बच्चे के रूप में, हम सभी बड़े जल्दी होना चाहते हैं और वे सभी विशेषाधिकार प्राप्त करना चाहते हैं जो हमारे आस-पास के वयस्कों के हकदार पास हैं । हालाँकि,जब हम बड़े होते हैं तो हमें एहसास होता है कि हम एक बच्चे के रूप में बेहतर थे और एक बच्चे के रूप में दिन कितने खूबसूरत थे। हम जो कुछ भी करते,वे दिन कभी वापस नहीं आने वाले होते । लेकिन पेपर बोट बेवरेज आपको पोस्टरों की श्रृंखला के साथ उन अद्भुत वर्षों को फिर से जीने देता है जो बचपन की मासूमियत को दर्शाते हैं।

माँ के हाथों में अपने दोनो गाल पकड़वा कर कंघी कराना ।
माँ के रोटी बनाते समय आटे से जानवर, पक्षी या खिलोने बनाना ।
दोस्त का पेन ठीक करते समय इंक से मुँह और कपड़े गंदे कर लेना ।
गुड्डा गुड़िया या घर-घर खेलते वक्त माँ की पुरानी साड़ी से कपड़े बनाना ।
घर के गेट पर लटक कर अंदर बाहर झूलना ।
अपने भाई बहन को अंधेरे कमरे में ले जाकर कर अचानक भूत-भूत कहकर भागना ।
आसमान में उड़ते हुए हवाई जहाज़ से टाटा करना ।
ग़ुब्बारे की डोर को अंगुली में बांध कर खेलना ।
अपने से बड़े भाई-बहन से पुस्तकों पर ठीक से कवर चढ़ाना सीखना ।
छुपन-छुपाई खेलते समय दाँव देने वाले के पीछे ही छुपकर बैठ जाना ।
आँख मिचौली खेलते समय ताली से या हँसी से बहकाना ।
तालम-घोड़ा खेल में रूमाल को चुपके से डालना ।
झूलों की रस्सी को गोल गोल घुमाकर टाइट कर छोड़ देना जिससे झूला चक्कर खिला दे ।
ठंड के कपड़ों पर उठे हुये छोटे-छोटे गुच्छों से खेलना ।
जब घर पर कोई ना हो तो एक क्षत्र राज़ के साथ खेलना और शोर मचाना ।

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