शीर्षक:- “एक भारत, श्रेष्ठ भारत”

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नमों नमों का एक ही नारा है…….
एक भारत, श्रेष्ठ भारत हमारा है……
मिलकर हमें सर्वश्रेष्ठ हिन्दुस्तान बनाना है……
जुड़कर मिट्टी से, हमें आसमान से हाथ मिलाना है……
नमों नमों का एक ही नारा है…….
एक भारत, श्रेष्ठ भारत हमारा है……

आओं मिलकर एक नयी शुरुआत करें……
ऊच नीच की जैल से खुद को आजाद करें……
स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत हमें बनाना है……
काँटों के बिच रहकर फिर हमें गुलाब खिलाना है……
भर लो अपनी मुठ्ठी में सारा जहाँ तुम्हारा है……
एक भारत, श्रेष्ठ भारत हमारा है……

तोड़कर सारी रूढिवादियों को
एक नयें भारत की पहल करते है……
आओं वतन के लिए जीते है,
आओं वतन पर ही हम मरते है……
न पक्ष- विपक्ष, न तेरा न मेरा है…..
एक भारत, श्रेष्ठ भारत हमारा है……

नमों नमों का एक ही नारा है…….
एक भारत, श्रेष्ठ भारत हमारा है……

स्वर्ण पदकों की लगीं देखों कैसी बहार है……
नीरज के तलवार की अंबर तक पहुँचीं ललकार है……
बेटियां भी हमारी क्या किसी से कम है, तोड़कर बेडियाँ अपने पैरों की, दुनिया के कोने कोने में पहूँच रही उनके पायल की अब झनकार है……

नमों नमों का एक ही नारा है…….
एक भारत, श्रेष्ठ भारत हमारा है……

अलग अलग बोलियां हमारी……
अलग अलग लिबास है……
अलग अलग मजहब हमारा……
मगर हम एक ही के तो दास है……
नमों नमों का एक ही नारा है…….
एक भारत, श्रेष्ठ भारत हमारा है……

         आरती सुधाकर सिरसाट
        बुरहानपुर मध्यप्रदेश
      मौलिक, स्वरचित, अप्रकाशित रचना।

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