बुलंदी साहित्यिक सेवा समिति (पंजीकृत राष्ट्रीय स्तर) द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय परिवार दिवस पर किया गया आनलाईन कवि सम्मेलन का आयोजन

0
69

बालाघाट(मध्यप्रदेश)- बुलंदी संस्था की बालाघाट( मध्य प्रदेश) शाखा द्वारा आनलाइन काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसका सफल संचालन करते हुए सुरभि खनेडा़ जी ने अपनी कुछ पंक्तियां “जब चोट लगी मां याद आई, मेरी सारी मुसीबत मेरे पिता ने उठाई” के माध्यम से परिवार के प्रत्येक के महत्व को बताते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए डॉ कमला माहेश्वरी जी ने है” वसुधैव कुटुंबकम् अंशी अंश विधान ,देशबंधुता बोध दे भारत वेद पुराण” अपने दोहों के माध्यम से किस तरह भारतीय संस्कृति में परिवार को जीवन की इकाई माना गया है का सुंदर बखान किया।
इसके अतिरिक्त आ.सुरेन्द्र नौटियाल जी ने” कण कण में शिव शंकर है, साथ भवानी अम्बे , यही पे गंगा यही पे यमुना यही है चारों धाम” अपने सुंदर गीत के माध्यम से पावन देवभूमि की महिमा का बखान किया।
आ.जगदीश चन्द्र जोशी जी ने “जमी को कभी न हवाओं ने बांटा न मैदान ए जंगल न कंदराओं ने बांटा लकीरें खींची हैं बस आदमी ने न पानी न झरनों ने बांटा” इन सुंदर पंक्तियों के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
साहित्यकार एवं मीडिया एक्सपर्ट गुरुदीन वर्मा के अनुसार इस कार्यक्रम में उपस्थित सभी सम्मानित कलमकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं के माध्यम से सभी को मंत्रमुग्ध किया संस्था के संस्थापक आ.विवेक बादल जी व संरक्षक आ पंकज शर्मा जी की देखरेख में हुए इस कार्यक्रम का संचालन आ. सुरभि खनेडा़ जी,व सहसंचालन आ. नीलेश कुमार जी,आ. दीक्षा बिष्ट जी, टेक्नीशियन आ. रिंकू निगम जी द्वारा किया गया। इस कार्यक्रम में आ. राकेश शर्मा जी, आ मातृका बहुगुणा जी, आ. हरीश जी,आ. नवीन जी आ.नेहा त्रिपाठी आ. अभिषेक मिश्रा जी ने उपस्थित रहकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
बुलंदी संस्था का मुख्य उद्देश्य उन नवोदित कलमकारों को मंच प्रदान करना है, जिनको अपनी कलम संवारने/कलम के माध्यम से अपने विचारों की अभिव्यक्ति करने अथवा उनकी प्रतिभा को उभारने हेतु प्लेटफार्म नहीं मिल पाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here