बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने नौकरशाहों से स्पष्ट रूप से कहा था कि वे कमियों को प्रबंधित करने की मानसिकता से बाहर निकलकर अधिशेष के प्रबंधन की नई चुनौती का सामना करें।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक में अधिकारियों ने दावा किया कि लोकलुभावन योजनाएं आर्थिक रूप से सतत नहीं हैं और राज्यों को उसी राह पर ले जा सकती हैं, जिस पर श्रीलंका है। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को अपने शिविर कार्यालय पर सभी विभागों के सचिवों के साथ बैठक की थी।

इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, प्रधानमंत्री के प्रमुख सचिव पीके मिश्रा और कैबिनेट सचिव राजीव गौबा के साथ केंद्र सरकार के अन्य शीर्ष नौकरशाह भी शामिल हुए थे। साल 2014 के बाद से सचिवों के साथ प्रधानमंत्री की यह नौवीं ऐसी बैठक थी।

शनिवार को 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने शिविर कार्यालय में सभी विभागों के सचिवों के साथ चार घंटे की लंबी बैठक की। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने नौकरशाहों से स्पष्ट रूप से कहा था कि वे कमियों को प्रबंधित करने की मानसिकता से बाहर निकलकर अधिशेष के प्रबंधन की नई चुनौती का सामना करें।

पीएम मोदी ने प्रमुख विकास परियोजनाओं को नहीं लेने के बहाने के तौर पर ‘गरीबी’ का हवाला देने की पुरानी कहानी को छोड़ने और उनसे एक बड़ा दृष्टिकोण अपनाने के लिए कहा।

साथ ही बोले कोविड-19 महामारी के दौरान सचिवों ने जिस तरह से साथ मिलकर एक टीम की तरह काम किया, उसका उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि उन्हें भारत सरकार के सचिवों के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि केवल अपने संबंधित विभागों के सचिवों के रूप में और उन्हें एक टीम के रूप में काम करना चाहिए।

उन्होंने सचिवों से फीडबैक देने और सरकार की नीतियों में खामियों पर सुझाव देने के लिए भी कहा, जिनमें वे भी शामिल हैं जो उनके संबंधित मंत्रालयों से संबंधित नहीं हैं।

बता दें कि श्रीलंका वर्तमान में इतिहास के सबसे खराब आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। लोगों को ईंधन, रसोई गैस के लिए लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है, आवश्यक चीजों की आपूर्ति कम है।

साथ ही लोग लंबे समय तक बिजली कटौती के कारण हफ्तों से परेशान हैं। ऐसी बैठकों के अलावा, प्रधानमंत्री मोदी ने शासन में समग्र सुधार के लिए नए विचारों का सुझाव देने के लिए सचिवों के छह-क्षेत्रीय समूहों का भी गठन किया है।

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