जाने कन्या पूजन की विधि एवं कितने वर्ष की कन्या पूजन से होता है क्या लाभ

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शास्त्रों में कन्या को मां भगवती का स्वरूप माना गया है।
दुर्गा सप्तशती में आया है कि- “स्त्रिय: समस्ता: सकला जगत्सु”
आचार्य धीरज द्विवेदी”याज्ञिक” जी ने बताया कि-
कन्या पूजन से वास्तु दोष,विघ्न,भय और शत्रुओं का नाश होता है।
नवरात्रि में कन्या पूजन में ध्यान रखें कि कन्याओं की उम्र दो वर्ष से कम और दस वर्ष से अधिक भी न हो।
एक दिन पूर्व ही कन्याओं को निमंत्रण दे आवें।घर आने पर सर्वप्रथम किसी पात्र में कन्याओं का पैर धुलें,आसान पर बैठाकर कुमकुम का तिलक लगाएं फूल चढ़ाएं,चुनरी ओढ़ाएं,फिर भोजन कराएं, किसी पात्र में हाथ धुलवाएं,और कन्याओं को अपने सामर्थ्य अनुसार वस्त्र,दक्षिणा,फल,मिठाई,खिलौने,भोजन पात्र आदि देकर कन्याओं की परिक्रमा करते हुए पैर छूकर विदा करें।
आगे जानते हैं कि कन्याओं की उम्र कितनी होनी चाहिए और किस उम्र की कन्या पूजन से होगा क्या लाभ—
शास्त्रों के अनुसार दो वर्ष की कन्या को कुमारी कहा गया है। कुमारी के पूजन से सभी तरह के दुखों और दरिद्रता का नाश होता है।
तीन वर्ष की कन्या को त्रिमूर्ति माना गया है।त्रिमूर्ति के पूजन से धन लाभ होता है।
चार वर्ष की कन्या को कल्याणी कहते हैं।कल्याणी के पूजन से जीवन के सभी क्षेत्रों में सफलता और सुख समृद्धि की प्राप्ति होती है।
पांच वर्ष की कन्या को रोहिणी कहा गया है।माँ के रोहणी स्वरूप की पूजा करने से जातक के घर परिवार से सभी रोग दूर होते हैं।
छः वर्ष की कन्या को काली कहते हैं। माँ के इस स्वरूप की पूजा करने से ज्ञान,बुद्धि,यश और सभी क्षेत्रों में विजय की प्राप्ति होती है।
सात वर्ष की कन्या को चंडिका कहते हैं।माँ चण्डिका के इस स्वरूप की पूजा करने से धन,सुख और सभी तरह की ऐश्वर्यों की प्राप्ति होती है।
आठ वर्ष की कन्या को शाम्भवी कहते हैं।शाम्भवी की पूजा करने से युद्ध,न्यायलय में विजय और यश की प्राप्ति होती है।
नौ वर्ष की कन्या को दुर्गा का स्वरूप मानते हैं।माँ के इस स्वरूप की अर्चना करने से समस्त विघ्न बाधाएं दूर होती हैं,शत्रुओं का नाश होता है और कठिन से कठिन कार्यों में भी सफलता प्राप्त होती है।
दस वर्ष की कन्या को सुभद्रा स्वरूपा माना गया है।माँ के इस स्वरूप की आराधना करने से सभी मनवाँछित फलों की प्राप्ति होती है और सभी प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं।
इसीलिए नवरात्र पावन दिनों में संभव हो तो प्रतिदिन नहीं तो अष्टमी,नवमी को इन देवी स्वरुप कन्याओं को अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य से पूजा करके भेंट देना अति शुभ माना जाता है।इन दिनों इन नन्हीं देवियों को फूल,श्रृंगार सामग्री,मीठे फल (जैसे केले,सेब,नारियल आदि),मिठाई, खीर, हलवा,कपड़े,रुमाल,रिबन,खिलौने,मेहंदी आदि उपहार में देकर मां दुर्गा की अवश्य ही कृपा प्राप्त की जा सकती है।
इन उपरोक्त रीतियों के अनुसार माता की पूजा अर्चना करने से देवी मां प्रसन्न होकर हमें सुख, सौभाग्य,यश,कीर्ति,धन और अतुल वैभव का वरदान देती हैं।

आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष वास्तु धर्मशास्त्र एवं वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)

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