यूक्रेन पर रूस के हमले के विरोध में दुनियाभर में प्रदर्शन, लोगों ने यूक्रेन ने राष्ट्रपति पुतिन की तुलना हिटलर से की।

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रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुई जंग अब तबाही में बदलती जा रही है। यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद पुतिन के विरोध की आवाजें दुनिया भर में फैलती जा ही हैं। अमेरिका, जर्मनी, तुर्की समेत अन्य देशों में लोग विरोध जता रहे हैं तो साथ ही पुतिन को उन्हीं के देश के लोगों का विरोध भी झेलना पड़ रहा है।

रूस के सैकड़ों लोग भी सड़कों पर उतर कर विरोध जता रहे हैं। लोगों में पुतिन के खिलाफ गुस्सा दिख रहा है साथ ही संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के राजदूत सर्गीय किस्लित्स्या (Sergiy Kyslytsya) ने इस युद्ध की तुलना दूसरे विश्व युद्ध से और पुतिन की तुलना जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर (Adolf Hitler) से की।

उन्होंने कहा कि दूसरे विश्व युद्ध की तरह ही आज वैश्विक सुरक्षा खतरे में है, जिसने हमें ये आपातकालीन विशेष सत्र बुलाने को मजबूर किया। उन्होंने कहा, ‘अगर वो (पुतिन) अपने आपको मारना चाहते हैं तो उन्हें इसके लिए परमाणु हथियार की जरूरत नहीं होगी।

अप्रैल 1945 में बर्लिन में बंकर में एक व्यक्ति ने जो किया था, वही उन्हें भी करना चाहिए।’ पुलिस ने बताया कि मध्य बर्लिन में ब्रैंडनबर्ग गेट के आसपास भारी संख्या में लोग एकत्र हुए हैं और उन्हें अतिरिक्त जगह मुहैया कराई जा रही है। कुछ लोगों ने इस दौरान “यूक्रेन छोड़ो”, “पुतिन जाओ-इलाज कराओ और यूक्रेन और दुनिया को शांत रहने दो” लिखी हुई तख्तियां प्रदर्शित कीं।

यूक्रेन पर रूस के हुए हमले में अब तक सैकड़ों लोगों की जान चली गई है। आम नागरिकों से लेकर बच्चे में इन मौतों में शामिल हैं। पुतिन का यूक्रेन के खिलाफ ये रुख लोगों को बर्दाशत नहीं होते दिख रहा है। लोग पुतिन के इस रवैये को हिटलर से तुलना कर रहे हैं।

लोगों का कहना पुतिन नया हिटलर बन गया है। बता दें कि पुतिन के खिलाफ रूस के लोग भी सड़कों पर उतरें हैं। रशिया के लोग हाथ में फ्लैग लिए पुतिन और हमले के इस फैसले की निंदा कर रहे हैं। विरोध कर रहे लोगों के हाथों में कुछ ऐसे पोस्टर दिखे जिसमें लिखा है, मैं रशिया से हूं और यूक्रेन पर हुए हमले के खिलाफ खड़ा हूं।

किस्लित्स्या ने अपने संबोधन में रूस के लिए ‘The Third Reich’ शब्द का भी इस्तेमाल किया। इस शब्द का इस्तेमाल हिटलर के नाजी शासन के लिए किया जाता था। यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा का आपातकालीन सत्र बुलाया गया था। 1950 से लेकर अब तक 11 बार आपातकालीन सत्र बुलाया गया है।

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