महाशिवरात्रि पर्व 01 मार्च को इन चार शुभ मुहूर्त में अभिषेक कर भोलेनाथ को करें प्रसन्न

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हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। इस साल भोले बाबा का महापर्व महाशिवरात्रि 01 मार्च को फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाएगी। दिनांक – 28/02/2022 दिन बुधवार को त्रयोदशी है तथा इसी दिन रात्रि – 02:03 मि. पर यानी 01 मार्च को ही चतुर्दशी आ रही है। आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक” जी ने बताया की शास्त्रों के अनुसार जब रात्रि कालीन चतुर्दशी हो तो ही महाशिवरात्रि का व्रत एवं पूजन अधिक फलदाई होता है। इस दिन – 10:43 मि. दिन से परिघ योग उपरांत शिव योग रहेगा। सूर्य कुंभ राशि में तथा चंद्रमा दिन – 03:51 मि. तक मकर उपरांत कुंभ में एवं मंगल सहित बुध,शुक्र,शनि ग्रह मकर राशि में विराजमान रहेंगे। भगवान शिव के महापर्व को लेकर शहर के शिव मंदिरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।इस दिन शिवलिंग का पंचोपचार,षोडशोपचार,राजोपचार,पूजन और रात्रि जागरण विशेष फलदायी होता है। इस दिन भगवान शिव की आराधना कई गुना अधिक फल देती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से युवतियों को मनचाहे वर की प्राप्ति होती है। वैसे तो महाशिवरात्रि के दिन पूरे दिन भगवान शिव की पूजा का महत्व है परन्तु रात्रि कालीन चार प्रहर की विशेष पूजा का महत्व है। इस दिन प्रदोष काल तथा रात्रि काल का विशेष महत्व है। 01 मार्च मंगलवार को सायं – 05:49 मि. से – 07:05 मि.रात्रि तक तथा 02 मार्च को रात्रि में – 12:21 मि. तक पूजा,साधना का उत्तम समय है।
भगवान शिव और पार्वती का विवाह – पुराणों में वर्णन है कि भगवान शिव और मां पार्वती का विवाह इसी दिन हुआ था। भगवान शिव के विवाह में सिर्फ देव ही नहीं दानव, किन्नर,गंधर्व, भूत,पिशाच भी इस विवाह में शामिल हुए थे। इसलिए इसमें चार प्रहर की पूजा अधिक फलदायी होती है।
महाशिवरात्रि की पूजा का मुहूर्त –
1 – प्रथम प्रहर 01 मार्च
सायं – 05:49 मि. से रात्रि – 07:05 तक।
2 – द्वितीय प्रहर 01 मार्च
रात्रि 07:05 मि. से 09:05 मि. तक।
3 – तृतीय प्रहर 01-02 मार्च
रात्रि 09:05 मि. से 11 : 05 मि. तक।
4 – चतुर्थ प्रहर – 02 मार्च रात्रि – 11:05 मि. से रात्रि – 12:21 मि. तक साथ ही व्रत का पारण भी चतुर्दशी में ही कर लेना चाहिए यही शास्त्राज्ञा है।
शिव पूजन और रूद्राभिषेक – महाशिवरात्रि पर शिवलिंग को गंगाजल, दूध,दही, घी, शहद और शक्कर के मिश्रण से स्नान करवाया जाता है, फिर चंदन लगाकर फल-फूल, बेलपत्र, धतूरा का पुष्य, मंदार पुष्य, बेर,जौ की बालियों, शमीपत्र इत्यादि अर्पित किए जाते हैं। कहा जाता है कि इस दिन रूद्राभिषेक करने कराने से कई लाभ मिलते हैं।
।। सबका मंगल हो ।।
आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक”
(ज्योतिष शास्त्र, वास्तुशास्त्र, वैदिक अनुष्ठानों के विशेषज्ञ)

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