ये अद्भुत श्रृंगार नहीं, हमारी सनातन शास्त्रीय परंपरा पर प्रहार है।

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वर्तमान समय में मैं देख रहा हूं कि हमारे ही धर्म के कतिपय लोग यहां तक कि मठ एवं मंदिर के ही महानुभाव हमारे देव विग्रहों को अजीबो-गरीब वस्त्र पहना रहे हैं,श्रृंगार कर रहे हैं। बड़े दुख की बात है मन में बहुत ही पीड़ा होती है।
कभी भगवान श्री राधा कृष्ण के विग्रह को सांता क्लाज की पोशाक तो कभी श्री काल भैरव जी को पुलिस की वर्दी।

क्रिसमस पर पोस्ट और फोटो देखा कि भगवान श्री राधा कृष्ण जी को सांता क्लाज की पोशाक और आज एक पोस्ट और फोटो बाबा काल भैरव की दिखी जिसमें श्री काल भैरव जी वर्दी पहने नजर आए। यह फोटो और काल भैरव का यह वर्दीधारी स्वरूप चौंकाता भी है और यह सवाल भी उठाता है कि हम सनातन धर्म के शास्त्रीय विग्रहों और प्रतीकों को नए स्वरूप में ढालने की मुहिम चला रहे हैं या उनके शास्त्रीय स्वरूप को बदल रहे हैं?

जबकि मूर्तिपूजा,विग्रह प्राण प्रतिष्ठा,मूर्ति का पूजा विधान आदि सब शास्त्रीय कर्मकांड विधान के ही अंग हैं और वह अपने आप में ही एक शास्त्र हैं जिस पर आज भी एमए या आचार्य की डिग्री मिलती है और शोध होता है।
मैं धीरज द्विवेदी आप सबसे हाथ जोड़कर प्रार्थना करता हूं मजाक मत बनाइए देव विग्रहों का।

भगवान श्री राधा कृष्ण योग योगेश्वर हैं।
तथा बाबा काल भैरव जी ये उस शिव के कोतवाल हैं जो इस सृष्टि के आदिपुरुष हैं।
ये अद्भुत श्रृंगार नहीं अपितु हमारी शास्त्रीय परम्पराओं पर प्रहार है ये अक्षम्य अपराध है।
काशी सहित संपूर्ण आर्यावर्त में पहले भी देव विग्रहों को तोड़ा गया,फेंका गया,और अब मजाक बनाया जा रहा है।यह किस प्रकार कि मानसिकता एवं किस प्रकार का विकास है? यह प्रसन्नता की बात नहीं है।
जो पहनावा किया गया है भैरव बाबा का वो अनुचित है। मदिरा का भोग तो लगता ही है परन्तु फोटो में दिखाना कहां तक उचित है?
दूसरी बात पुलिस की वर्दी क्यों पहनाई गई है?

क्या बाबा भैरव जी पंद्रह अगस्त 1947 के बाद ही कोतवाल बनें हैं। ऐसा तो नहीं है भैरव बाबा अनादि काल से ही कोतवाल हैं और तभी से रक्षा कर रहे हैं।
लेकिन पुलिस की वर्दी और मूछ को शो करना यह दिखाकर क्या साबित करना चाहते हैं आप सब।
ये सरासर गलत है,अन्याय है सनातन धर्म के साथ।

देव का श्रृंगार देव की तरह ही करें न की सांता क्लाज, बॉलीवुड अभिनेता एवं आधुनिक कोतवाल की तरह।
आप सबसे करबद्ध प्रार्थना है कि सनातन धर्म की गरिमा का पालन करें,धर्म की रक्षा करें।।
।। सत्य सनातन धर्म की जय हो ।।
‌ ।। सबका मंगल हो ।।

आचार्य धीरज द्विवेदी “याज्ञिक

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