तमिलनाडु के लावण्या के धर्म परिवर्तन को लेकर आत्महत्या केश पर स्कूल प्रबंधन ने धर्म परिवर्तन के दावों को किया खारिज।

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तमिलनाडु के तंजावुर में 17 वर्षीय एक छात्रा लावण्या ने धर्म परिवर्तन को लेकर बनाए जा रहे दबाव और यातनाओं के आगे मजबूर होकर आत्महत्या कर ली। दरअसल लावण्या पर स्कूल के अधिकारियों ने ईसाई धर्म में परिवर्तित होने का दवाब डाला। लावण्या ने इससे इनकार कर दिया, जिसके बाद स्कूल के अधिकारियों ने उसे प्रताड़ित करना शुरू कर दिया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लावण्या तंजावुर में सेंट माइकल्स गर्ल्स होम नाम के एक बोर्डिंग हाउस में थी। 12वीं की छात्रा लावण्या ने 9 जनवरी को जहर खाकर खुदकुशी का प्रयास किया था। आत्महत्या करने वाली लड़की का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह जबरन धर्म परिवर्तन कराने का आरोप लगा रही है।

लड़की ने अपने वीडियो में स्कूल द्वारा जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगाते हुए छात्रावास में काम करने के लिए मजबूर करने की शिकायत की, जिससे उसकी पढ़ाई डिस्टर्ब हुई। वीडियो में लड़की का आरोप है कि वार्डन ने उससे बहीखाता का काम करवाया, हॉस्टल के गेट को खोलने और बंद करने के अलावा पानी के मोटर चालू और बंद करने का काम कराया गया।

उसने आरोप लगाया कि उसे सौंपे गए काम के कारण वह अच्छी तरह से पढ़ाई नहीं कर पा रही थी। वीडियो में कहा गया है, “मेरा नाम लावण्या है।

उन्होंने (स्कूल) मेरे माता-पिता से मेरी उपस्थिति में पूछा था कि क्या वे मुझे ईसाई धर्म में परिवर्तित कर सकते हैं और आगे की पढ़ाई के लिए मदद कर सकते हैं। चूँकि मैंने नहीं माना, वे मुझे डाँटते रहे।” उसने खुलासा किया कि सिस्टर का नाम समया मैरी था।

तमिलनाडु में ईसाई धर्म के लोग अल्पसंख्यक समुदाय में आते हैं। और, ईसाई धर्म के लोगों को डीएमके का फिक्स वोटबैंक माना जाता है।कहा जा रहा है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई न करने की एक बड़ी यही है। वहीं, भाजपा प्रवक्ता एसजी सूर्या ने दावा किया है कि लावण्या के पिता डीएमके कार्यकर्ता हैं। लेकिन, वोटबैंक की राजनीति के चक्कर में डीएमके की स्टालिन सरकार चुप है।

हालांकि अब लड़की का वीडियो सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने सभी आरोपों से इनकार किया है। प्रबंधन ने एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया है कि प्रबंधन ने कभी भी छात्रों की धार्मिक मान्यताओं में हस्तक्षेप नहीं किया।

उन्होंने कहा कि हाशिए पर रहने वालों और शिक्षा से बच्चों को शिक्षित करने के एकमात्र उद्देश्य से 180 वर्षों से संस्था चला रहे हैं। “हजारों छात्र जिन्होंने हमारे प्रतिष्ठानों में अध्ययन किया है, वे इसकी गवाही देते हैं।

हमारे स्कूल संविधान में निहित सिद्धांतों के अनुसार और हमारे छात्रों की धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर मानवतावाद के आधार पर चलाए जाते हैं। हमारी सामाजिक प्रतिबद्धता को बदनाम करना और हमारे संस्थानों पर झूठ का आरोप लगाना निंदनीय है। ”

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