मोदीयुग में सनातन आस्था का उदय

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बनारस अर्थात बाबा विश्वनाथ की नगरी, माँ गंगा की नगरी ,पंडितों की नगरी, सनातन आस्था का तीर्थ जिसे हम वाराणसी(बनारस) कहते हैं।

बनारस के सांसद और देश के प्रधानमंत्री ‘नरेंद्र मोदी ‘ जब जब बनारस जाते हैं पूरी दुनिया की नजर बनारस पर टिक जाती है, वो हर बार बनारस में कुछ नया करते हैं, जो सनातन संस्कृति और आस्था को पूरे विश्व में सभी परंपराओं में प्रकर्ष होने का प्रमाण प्रदान करता है।
इसबार भी कुछ ऐसा ही हुआ जब प्रधानमंत्री मोदी बनारस पंहुचे और वँहा उन्होंने बनारस कॉरिडोर का उद्घाटन किया तो पूरी दुनिया उस क्षण काशी को देख रही थी , कि कैसे विश्व की सबसे पुरानी सभ्यता ,सबसे पुरानी परंपरा अपने आस्था के केंद्र को एक नया आयाम प्रदान कर रहा है।

काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण पर पीएम ने काशी की पुरातन संस्कृति और नवीनता का जिक्र कर बनारस की छवि दुनिया के सामने और मजबूत की ।
उन्होंने गंगा में डुबकी लगाकर आस्था और धर्म परायणता का उदाहरण प्रस्तुत किया तो इसके साथ उन्होंने गंगा की स्वच्छता पर सवाल खड़े करने वालों को भी करारा जवाब दिया।
अयोध्या में राम मंदिर का शिलान्यास के बाद काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के बहाने मोदी ने हिंदू आस्था के प्रति रिश्ता और प्रगाढ़ किया, प्रधानमंत्री मोदी ने हिन्दू और सनातन आस्था के प्रति अपने समर्पित भाव का प्रमाण भी दिया है।

राजनीतिक दृष्टिकोण से भी काशी धाम में भव्य आयोजन काफी महत्वपूर्ण है,सांस्कृतिक नगरी काशी को नई पहचान दिलाने और उसका गौरव वापस लौटाने का दावा करने वाली भाजपा इस कार्यक्रम के बहाने पूरे पूर्वांचल का सियासी समीकरण साधने का प्रयास कर रही है।

इसकी झलक उस समय दिखाई दी जब पीएम ने अपने संबोधन में महाराजा सुहेलदेव और शिवाजी को एक साथ याद किया।

यह प्रधानमंत्री मोदी बखूबी जानते हैं कि पूर्वांचल में सुहेलदेव का क्या महत्व है।
पहले अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, और अब काशी धाम का नवीनीकरण इस बात को दर्शाता है कि मोदीयुग में सनातन आस्था का किस प्रकार उदय हुआ है, और वैश्विक पटल पर उसे प्रकर्षता के संग एक नई पहचान मिली है।

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