67 साल बाद एयर इण्डिया घर वापसी को तैयार ।

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केंद्र सरकार ने एयर इंडिया (Air India) के विनिवेश (बेचने) की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ा लिया है। अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा तो भारत की सरकारी एयरलाईन कम्पनी 67 साल बाद अपनी मुल कम्पनी टाटा संस के वापस जा सकती है। भारत के सबसे बड़े व्यापार समूह टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस और बजट एयरलाइन स्पाइसजेट के प्रमुख अजय सिंह घाटे में चल रही सरकारी एयरलाइन एअर इंडिया के अधिग्रहण के लिए वित्तीय बोलियां सौंपने वालों में शामिल थे।

विनिवेश की प्रक्रिया का संचालन करने वाले विभाग के सचिव तुहिन कांत पांडे ने वित्तीय ‘बोलियां’ मिलने के बारे में ट्वीट किया, लेकिन यह नहीं बताया कि कितनी कंपनियों ने बोलियां सौंपी हैं। टाटा संस के प्रवक्ता ने इस बात की पुष्टि की कि समूह ने राष्ट्रीय विमानन कंपनी के लिए बोली सौंपी है। सूत्रों का कहना है कि अगर बोलियां सही पाई जाती हैं तो एयर इंडिया को दिसंबर तक नए मालिक को सौंपा जा सकता है।

इससे पहले दिन में डिपार्टमेंट ऑफ इनवेस्टमेंट एंड पब्लिक एसेट मैनेजमेंट (DIPAM) ने ट्वीट किया था कि एयर इंडिया के विनिवेश के लिए फाइनेंशियल बोलियां मिल गई हैं और यह प्रक्रिया अब अंतिम चरण में प्रवेश कर रही है। अब तक एयर इंडिया के लिए केवल दो बोलियां मिली हैं। सरकार अपने हिस्से की 100 प्रतिशत हिस्सेदारी प्राइवेट सेक्टर को बेच देना चाहती है।

सरकार की AI Express Ltd में 100 प्रतिशत और एयर इंडिया SATS Airport Services Private लिमिटेड में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी है। जानकारों का कहना है कि केंद्र की विनिवेश योजना में टाटा ग्रुप सबसे आगे चल रहा है। Air India, 2007 में घरेलू विमान सेवा इंडियन एयरलाइंस के साथ अपने विलय के बाद से घाटे में चल रही है। एयरलाइन के लिए सफल बोली लगाने वाली कंपनी को घरेलू हवाई अड्डों पर 4,400 घरेलू और 1,800 अंतरराष्ट्रीय लैंडिंग एवं पार्किंग स्लॉट के साथ-साथ विदेशी हवाई अड्डों पर 900 स्लॉट का नियंत्रण हासिल होगा।

इसके अलावा, कंपनी को एयरलाइन की कम लागत वाली सेवा एयर इंडिया एक्सप्रेस का 100 प्रतिशत और एआईएसएटीएस का 50 प्रतिशत स्वामित्व मिलेगा। एआईएसएटीएस प्रमुख भारतीय हवाई अड्डों पर कार्गो और ग्राउंड हैंडलिंग सेवाएं प्रदान करती है। सूत्रों के मुताबिक एयर इंडिया पर कर्ज बढ़कर 43,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एयर इंडिया ने ये सारा कर्ज भारत सरकार की गारंटी पर ले रखा है। जिसके चलते सरकार पर भार बढ़ता जा रहा है। विनिवेश के बाद एयर इंडिया को नए मालिक को ट्रांसफर करने से पहले भारत सरकार इस कर्ज का भुगतान करेगी।

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